अमिताभ को 'महानायक' बनाने वाला 80 का दशक!

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Published At : Oct-10-2017

Publisher : Xpose News

Category : Entertainment

अमिताभ बच्चन इस बार अपना 75वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं. जैसा कि आप हमारी पिछली किश्त पढ़कर जान चुके हैं कि हम बिग-बी के बर्थडे वीक बात करेंगे उनकी फिल्मों की. वो फिल्में जिन्होंने उन्हें बनाया इंडस्ट्री का 'एंग्री यंग मैन'. इसी क्रम में पेश है हमारी अगली किश्त. 80 का दशक वो समय था जब अमिताभ का करियर पीक पर था. वो बॉलीवुड में इतने स्थापित हो चुके थे कि एक फ्रेंच डायरेक्टर ने तो उन्हें 'वन इंडस्ट्री' भी कह दिया था. लेकिन जिस तेजी से करियर राइज हुआ उतनी ही तेजी से नीचे भी आया . इस पूरे दशक में दो तीन साल ऐसे आए कि उनकी कोई भी फिल्म नहीं चल सकी. तो आइए जुड़िए सदी के महानायक की फिल्मों से जुड़े रोचक किस्से और कहानियों से. अमिताभ बच्चन की 80 के दशक की टॉप फिल्में : अमिताभ बच्चन की 80 के दशक की टॉप फिल्में : 1 . शान ( 1980 ) :सलीम-जावेद की लिखी एक कहानी पर रमेश सिप्पी ने फिल्म बनाई और इसे नाम दिया ' शान '. इस फिल्म में अमिताभ के साथ शशि कपूर, परवीन बॉबी, सुनील दत्त और राखी भी थे. रमेश इस फिल्म में शोले की कास्ट को रिपीट करना चाहते थे, लेकिन एक्टर्स के बिजी शेड्यूल के चलते धर्मेंद्र की जगह शशि कपूर और हेमा मालिनी की जगह बिंदिया गोस्वामी को लिया गया. फिल्म थिएटर्स में लगी और अच्छा पैसा भी कमाया, लेकिन लोगों ने इसे 'शोले' जितना पसंद नहीं किया. फिल्म को बनने में कुल तीन साल का समय लगा. 'शोले' फिल्म का म्यूजिक देने वाले आरडी बर्मन ने इस फिल्म में भी अपना म्यूजिक दिया था. जिसके लिए उनका नाम फिल्मफेयर अवार्ड्स के लिए 'बेस्ट म्यूजिक अवार्ड'के लिए नॉमिनेट भी किया गया. 2 . दोस्ताना ( 1980 ) : डायरेक्टर राज खोसला की आखिरी सबसे बड़ी और सक्सेसफुल फिल्म. अपने दौर में 'कुर्बानी' के बाद यह सबसे बड़ी चौथी फिल्म थी. इस फिल्म का फन फैक्ट यह है कि पूरी फिल्म में अमिताभ को बब्बल गम चबाते हुए दिखाया गया है. इस फिल्म में अमिताभ का नाम विजय है. विजय नाम के साथ अमिताभ का शायद कोई अलग कनेक्शन है क्योंकि कम से कम बीस फिल्मों में उनका नाम विजय रह चुका है.इस फिल्म में प्रेम चोपड़ा का 'जस्ट ए मोमेंट, जस्ट ए मोमेंट' डायलॉग भी काफी फेमस हुआ था. फिल्म को फिल्म फेयर अवार्ड्स के लिए चार कैटेगरी के अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया था. 3 . लावारिस ( 1981 ) :इस साल अमिताभ की लगभग नौ फिल्में रिलीज हुई. इनमें से कोई सुपर हिट तो कोई हिट रही. प्रकाश मेहरा की अमिताभ के साथ बनाई गई 'लावारिस' अपने गानों की वजह से खूब चर्चा में रही. ' मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है', 'कब के बिछड़े हुए हम', 'अपनी तो जैसे तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे, कट जाएगी' इस फिल्म के फेमस गाने थे. इसके अलावा घरों में खेलने वाली बच्चा पार्टी का फेवरेट डायलॉग 'अगर अपनी मां का दूध पीया है तो सामने आ' भी इसी फिल्म का डायलॉग है.अलका याग्निक ने इस फिल्म में अपना सिंगिंग डेब्यू किया था. 'मेरे अंगने' के लिए उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के लिए नॉमिनेट भी किया गया. यह फिल्म उस साल की 'वन हंड्रेड करोड़ क्लब' का हिस्सा बनने वाली फिल्मों में से एक थी. 4 . नसीब ( 1981 ) :'लोस्ट एंड फाउंड' थीम पर बनी मनमोहन देसाई की यह फिल्म 'भव्य सेट', 'बड़ी कास्ट 'और 'धमाकेदार म्यूजिक' का तगड़ा कॉम्बिनेशन थी . फिल्म में अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी और ऋषि कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे. यह सुपरहिट फिल्म भी 'वन हंड्रेड करोड़ क्लब' का हिस्सा बनी. इसके बाद इसे तमिल और तेलुगु भाषाओं में भी बनाया गया.कहा जाता है कि फिल्म के गाने 'जॉन जानी जनार्दन' के लिए देसाई ने लगभग पूरी फिल्म इंडस्ट्री को इकठ्ठा कर लिया था. ओम शांति ओम का मल्टी स्टारर गाना इसी गाने से इंस्पायर्ड है. इसके अलावा बॉलीवुड की यह ऐसी पहली फिल्म थी जिसका ट्रेलर फिल्म रिलीज होने से पहले ही दूरदर्शन पर दिखाया गया था.



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